सेट क्या होता है और कितने प्रकार का होता है

बहुत सारे लोग जो जिम जाते हैं उन्होंने एक शब्द बहुत सुना होगा “सेट”। एक जिम में इस्तेमाल होने वाला आम शब्द है जिसे हम लगभग हर दूसरे मिनट इस्तेमाल करते हैं। लेकिन बहुत से लोगों को नहीं पता सेट होता क्या है और यह कितने प्रकार का होता है। आज हम बात करेंगे सेट के बारे में और इसके सभी प्रकारों को समझेंगे और उनके इस्तेमाल की भी बात करेंगे।

सेट क्या होता है

सेट एक से अधिक रैप्स का ग्रुप होता है। आसान शब्दों में कहें तो जब आप लगातार किसी एक्सरसाइज़ के रैप्स करते हैं तो वह एक सेट कहलाता है।

जैसे कि आप ने बैंच प्रैस में दस बार प्रैस किया तो वह दस रैप्स का एक सेट कहलाता है। और अगर आप यही 3 बार करते हो तो यह एक एक्सरसाइज़ के 3 सेट कहलाएंगे।

सेट के प्रकार


सेट भी क‌ई तरह के होते हैं। हर सेट अलग तरीके से किया जाता है हर किसी के अलग-अलग फायदे हैं।

स्ट्रेट सेट

इस सेट को नोर्मल सेट भी कहते हैं। यह साधारण सेट होता है जिसमें आप 12-15 रैप्स करने के बाद और अगले सेट के बीच में आप 30-60 सेकंड का रैस्ट लेते हैं। यह रोजाना इस्तेमाल किया जा रहा वाला आम सेट है।

इस सेट का फायदा यह है कि इसमें काफी ज्यादा वजन उठा सकते हैं क्योंकि हमारे मसल्स को रेस्ट मिल जाता है जिससे वह रिकवर होकर दोबारा वजन उठा सकते हैं।

वन रेप मैक्स या अपनी वजन उठाने की सीमा बढ़ाने के लिए यह सेट सबसे उत्तम होता है।

सुपरसेट

सुपरसेट वह सेट होते हैं जिनमें कोई भी दो एक्सरसाइज बिना रुके एक के बाद एक की जाती है और दोनों एक्सरसाइज अलग-अलग मसल्स की होती हैं।

सुपर का इस्तेमाल समय की बचत के लिए किया जाता है या शरीर पर अधिक जोर डालने के लिए किया जाता है। सुपर सेट में आप अधिक वजन नहीं उठा सकते क्योंकि आपको एक के बाद एक दो एक्सरसाइज करनी होती हैं तो आपका शरीर बहुत ज्यादा वजन नहीं उठा सकता।

की जाने वाली दोनों एक्सरसाइज कंपाउंड या आइसोलेशन हो सकती है या एक कंपाउंड और एक आइसोलेशन हो सकती है।

कंपाउंड सेट

कंपाउंड सेट वह सेट होते हैं जिनमें कोई भी दो एक्सरसाइज एक के बाद एक की जाती है बिना रैस्ट के और वह दोनों एक ही मसल्स की होती है।

ज्यादातर की जाने वाली पहली एक्साइज कंपाउंड होती है और दूसरी आइसोलेशन होती है। क्योंकि इसमें आप एक ही मसल को टारगेट करते हैं तो पहले आप बहुत ज्यादा वाला वजन उठाते हैं और फिर मसल्स को आइसोलेट करके उनकी सीमा तक ले जाते हैं।

इस सेट का इस्तेमाल किसी एक मसल पर टेंशन बढ़ाने के लिए किया जाता है ताकि वह मसल तेजी से बढ़ सके।

ट्राई सेट

इस सेट में कोई भी 3 एक्सरसाइज बिना रेस्ट लिए की जाती है। इस सेट में की जाने वाली तीनों एक्सरसाइज अलग-अलग मसल्स की हो सकती है या किसी एक ही मसल की हो सकती है। इस सेट का इस्तेमाल मसल्स शोक करने के लिए किया जाता है। इसका इस्तेमाल रोजाना या हर एक वर्कआउट में नहीं किया जा सकता।

जाइंट सेट

जांइट सेट वह सेट होते हैं जिनमें कोई भी चार एक्साइज एक के बाद एक की जाती है इन सेट के बीच में कोई रैस्ट नहीं होता।

जैसे कि पहले आपने बेंच प्रेस किया उसके बाद आपने पुलअप्स किया और बिना रुके आपने लेग एक्सटेंशन और उसके बाद बारबैल कर्ल किया, तो यह एक जॉइंट सेट होता है।

ड्रॉप सेट

यह वह सेट होते हैं जिनमें हैवीवेट से मैक्सिमम रैप्स करने के बाद जब आप वह वजन नहीं उठा सकते हैं तो आप वजन कम करके कुछ और रैप्स निकालते हैं और उसके बाद वजन और कम करके आप फेलियर तक मसल्स को ट्रेन करते हैं। अधिकतर ड्रॉप सेट आखिरी सेट में इस्तेमाल किया जाता है। इस सेट को आप आइसोलेशन और कंपाउंड दोनों तरह की एक्सरसाइज में इस्तेमाल कर सकते हैं और यह हर एक मसल्स के लिए लाभकारी होता है। आप चाहे तो इसका इस्तेमाल अपनी हर एक्सरसाइज के आखिरी सेट में कर सकते हैं।

पिरामिड सेट

पिरामिड सेठ को रिवर्स रोचक भी कह सकते हैं क्योंकि इसमें वजन घटाने की जगह आप वजन पढ़ाते हैं। मतलब जैसे आपने बेंच प्रेस के 12 रैप्स किए तो फिर आप वेट को बढ़ाएंगे और 10 रैप्स लगाएंगे और फिर वजन बढ़ाकर 8 रैप्स और लगाएंगे, इसे पिरामिड सेट कहां जाता है।

रेस्ट-पोज़ सेट

यह वह सेट होते हैं जिनमें आप वजन को पोज़ करके मसल्स पर मैक्सिमम टेंशन लाते हैं। जैसे कि अगर आप बेंच प्रेस कर रहे हैं तो आप बार को जब चेस्ट के नजदीक लाएंगे तो आप उसे 1 सेकंड के लिए होल्ड करेंगे और फिर उसे वापस ऊपर धकेलेंगे इसे रेस्ट-पोज़ सेट कहा जाता है।

परंतु याद रहे यह सेट हल्के वजन के साथ किया जाता है। यह सेट आइसोलेशन एक्साइज में इस्तेमाल करने से काफी लाभ मिलता है, क्योंकि वजन कम होने की वजह से आपके मसल्स पर टेंशन थोड़ा कम होता है, लेकिन समय सीमा बढ़ाकर आप मसल्स पर अधिक टेंशन डालते हैं जिससे साउथ भारी वजन उठाने जैसा कार्य करते हैं।

यह थे सभी तरह के सेट जिनका इस्तेमाल फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग में किया जाता है आप भी इनका इस्तेमाल करके अपने वर्कआउट में बदलाव कर सकते हैं और अपने मसल्स को शौक करके बढ़ा सकते हैं।

अगर आपके कोई विचार है तो हमारे साथ कमेंट सेक्शन में शेयर करें।

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